Saturday, 22 February 2020

Cash Book को कैसे बनाया जाता है ? 

Notes :-स्टूडेंट इसे ध्यान से पड़े.
रोकड़ बही के डेबिट पक्ष का योग क्रेडिट पक्ष के योग से हमेशा अधिक होता है, वह कभी भी कम नहीं हो सकता है। इसका कारण यह है कि भुगतान तभी किया जाएगा जबकि व्यवसाय में पैसे हों।

बनाने के कुछ नियम इस प्रकार है :
१-रोकड़ बही के दोनों पक्षों - डेबिट और क्रेडिट - में एकसमान खाने होते है तथा दोनों पक्षों में पांच खाने होते हैं।
२-तिथि वाले खाने में सबसे पहले वर्ष व महीना लिखा जाता है। फिर नकद प्राप्तियों/भुगतानों की तिथि लिखी जाती है।
३-डेबिट पक्ष के विवरण खाने में उन खातों के नाम लिखे जाते हैं जिनके संबंध में नकद भुगतान प्राप्त हुए हैं। क्रेडिट पक्ष के विवरण खाने में उन खातों के नाम लिखे जाते हैं जिनके संबंध में नकद भुगतान या खर्चे किए गए हैं। नाम पक्ष में To और जमा पक्ष में By शब्द का प्रयोग किया जाता है।
४-प्रमाणक संख्या वाले खाने में उन रसीदों की संख्या लिखी जाती है जो प्राप्तियों तथा भुगतानों से संबंधित होती हैं।
५-खाता-बही संख्या वाले खाने में खाता- बही की उस पृष्ठ संख्या को लिखा जाता है जिसमें राशि की खतौनी की गई है।
६-राशि वाले खाने में लेन-देन की राशि लिखी जाती है।
रोकड़ बही के निम्नलिखित मुख्य विशेषताएं है :
  • रोकड़ बही लेन-देन के केवल एक पक्ष अर्थात प्रकृति पर प्रकाश डालती हैं।
  • लेन-देनों का अभिलेखन क्रमबद्ध रूप में किया जाता है।
  • रोकड़ प्राप्तियों को रोकड़ बही के डेबिट पक्ष में लिखा जाता है।
  • रोकड़ प्राप्तियों को रोकड़ बही के डेबिट पक्ष में लिखा जाता है जबकि रोकड़ भुगतानों को क्रेडिट पक्ष में।
  • रोकड़ बही एक रोजनामचाकृत खाता-बही है। यह सहायक पुस्तक तथा प्रमुख पुस्तक दोनों ही है।
जिस Cash Book में Ammount का एक ही Column होता है उसे Simple Cash Book कहा जाता है ।
इसमें केवल नकद लेन-देन ही लिखे जाते हैं। इसे एक खाने वाली रोकड़ बही भी कहते हैं। अतः बैंक संबन्धी लेन-देन और कटौती के लेन-देन इस बही में नहीं लिखे जाते।
यह नकद खाते का ही एक रूप होती है। नकद प्राप्तियों को इसके डेबिट पक्ष में और नकद भुगतानों को क्रेडिट पक्ष में लिखा जाता है। इस प्रकार रोकड़ बही रोकड़ खाते का काम करती है।
रोकड़ बही तथा जर्नल में निम्नलिखित समनताएँ है :
a-जर्नल की तरह रोकड़ वही में भी सभी लेन-देनों को तिथिवार लिखा जाता है।
b-जर्नल की तरह ही रोकड़ बही में भी खाता पृष्ट संख्या रहता है।
c-जर्नल की तरह रोकड़ वही में भी नैरेशन दिए जाते है।

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